घर से निकले थे हौसला करके,लौट आए खुदा खुदा करके,हमने देखा है तज्रुबा करके,जिन्दगी तो कभी नही आए,मौत आए जरा जरा करके,लोग सुनते रहे दिमाग की बात,हम चले दिल को रहनुमा करके,किसने पाया सुकून दुनिया मे,ज़िन्दगानी का सामना करके,